क्रोध का मुख्य कारण यह है कि हम चाहते हैं कि दुनिया हमारे हिसाब से चले। ठाकुर जी समझाते हैं कि सामने वाले को उसकी गलतियों के साथ स्वीकार करना ही 'क्षमा' है। यह याद रखें कि जो व्यक्ति गुस्सा कर रहा है, वह मानसिक रूप से बीमार है। रोगी पर गुस्सा नहीं, दया की जाती है।
3. सहिष्णुता और क्षमा (Tolerance and Forgiveness)
मन के क्रोध को कैसे शांत करें? (How to Calm the Anger of Mind)
4. लंबी सांसें लें (Deep Breathing)
क्रोध को दबाना नहीं, बल्कि उसे से बदलना जरूरी है। जब हृदय में भक्ति और प्रेम का वास होता है, तो क्रोध के लिए कोई स्थान नहीं बचता। याद रखिए, शांत मन ही ईश्वर का असली मंदिर है। राधे-राधे!
जब भी क्रोध आए, सबसे पहला नियम है—। ठाकुर जी महाराज कहते हैं कि क्रोध की अवस्था में शब्द जहर के समान होते हैं। यदि उस समय आप कुछ बोलेंगे, तो वह केवल रिश्तों को तोड़ेगा। 10 मिनट का मौन आपके मस्तिष्क को शांत करने के लिए पर्याप्त है। 2. 'हरि नाम' का आश्रय
क्रोध एक ऐसी अग्नि है जो दूसरे को जलाने से पहले खुद को जलाती है। हम अक्सर छोटी-छोटी बातों पर अपना आपा खो देते हैं, जिसका परिणाम बाद में पछतावा होता है। के अनुसार, क्रोध कोई बाहरी शक्ति नहीं, बल्कि हमारे मन की एक दुर्बलता है।
मन को शांत करने का सबसे अचूक उपाय है—। जैसे ही क्रोध की लहर उठे, अपना ध्यान भगवान के नाम (जैसे 'राधे-राधे' या 'ॐ नमः शिवाय') पर लगा दें। जब मन भगवान के चरणों में जुड़ता है, तो संसार की तुच्छ बातें उसे विचलित नहीं कर पातीं।